The Umeed

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सफ़र की कहानी (Story of the journey)

वर्ष 2022 में भारत के पूर्वी भाग बिहार के छोटे शहर समस्तीपुर से कुछ संवेदनशील और जागरूक दोस्तों का समूह, जिन्होंने शिक्षा को केवल व्यक्तिगत प्रगति ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना। NSS और NCC की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी ने उन्हें अनुशासन, सेवा और नेतृत्व की सीख दी, जिन्हें उन्होंने अपने व्यवहारों में उतारा। कॉलेज के बाद वे झुग्गी- बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाने, नशे की ओर बढ़ते किशोरों को समझाने और जरूरतमंदों की मदद करने में लगे रहे। अपनी मासिक पॉकेट मनी से जरूरतमंद बच्चों के लिए पाठ्य-सामग्रियाॅं खरीदीं और खुले आकाश के नीचे कक्षाएँ शुरू कीं। इसके लिए हमें अनेक कठिनाई का सामना करना पड़ा। फिर भी धीरे-धीरे यह प्रयास उत्साह और उम्मीद से प्रेरित होकर, द उम्मीद ने अपने सपने को आकार दिया। पिछले वर्षों में, द उम्मीद एक स्थायी सामाजिक संस्था के रूप में विकसित हुई है – जो जमीनी स्तर पर वास्तविक काम करने के लिए प्रतिबद्ध है और समाज तथा समुदाय को बदलाव की प्रक्रिया में समावेशी बनाने का प्रयास करती है। इस यात्रा में, हमें कई कठिन फैसले लेने पड़े और लगातार नवाचार करना पड़ा – चाहे वह पढ़ाई और शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर सेवा-प्रदान करने का दृष्टिकोण अपनाना हो, प्रबंधन सिद्धांतों और व्यवसाय जैसी रणनीति को विकास क्षेत्र में लागू करना हो, व्यवसायों और संसाधनों को केंद्र में रखकर एक अनोखी मॉडल तैयार करना हो, या नागरिक-संचालित बदलाव की अवधारणा को बढ़ावा देना हो। द उम्मीद ने इन सबके लिए निरंतर सकारात्मक प्रयास करता रहा है। हाॅं, द उम्मीद ने अक्सर कम चले गए रास्ते को चुना, और यही हमारे लिए फर्क लाने वाला रहा है। द उम्मीद आज जरूरतमंद बच्चों और लोग के जीवन में उम्मीद की नई किरण बन रही है।